Class 9 science chapter 14 Notes in hindi || 9th science chapter 14 Notes || कक्षा 9 विज्ञान पाठ 14 नोट्स ||

 





Class 9th science Chapter :- 14 

प्राकृतिक संपदा विज्ञान



पृथ्वी पर संपदा


  • पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को स्थलमंडल कहते हैं

  • पृथ्वी की सतह से लगभग 75% भाग पर पानी है| यह भूमिगत रूप में भी पाया जाता है| यह समुद्र, नदियों, झीलों, तालाबों आदि के रूप में है| इन सब को मिलाकर जलमंडल कहते हैं|

  •  वायु जो पृथ्वी पर एक कम्बल की तरह कार्य करता है, वायुमंडल कहलाता है|


जैवमंडल


• जीवन का भरण-पोषण करने वाला पृथ्वी का क्षेत्र, जहाँ वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल एक-दूसरे से मिलकर जीवन को सम्भव बनाते हैं, उसे जैवमंडल कहते हैं| 


  • यह दो प्रकार के घटकों से मिलकर बनता है:


(i) जैविक घटक- पौधे एवं जंतु


(ii) अजैविक घटक- हवा, पानी और मिट्टी|



जीवन की श्वास- वायु


  • वायु कई गैसों जैसे- नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड और जलवाष्प का मिश्रण है| 

  • वायु में नाइट्रोजन 78% और ऑक्सीजन 21% होते हैं| कार्बन डाइऑक्साइड बहुत कम मात्रा में वायु में होती है| 


  • हीलियम, नियान, ऑर्गन और क्रिप्टान जैसे उत्कृष्ट गैसें अल्प मात्रा में होती है|


वायुमंडल की भूमिका


• वायु ऊष्मा की कुचालक है- वायुमंडल दिन के समय और वर्ष भर पृथ्वी के औसत तापमान को लगभग नियत रखता है|


• यह दिन के समय तापमान में अचानक वृद्धि को रोकता है और रात के समय ऊष्मा को बाहरी अन्तरिक्ष में जाने की दर को कम करता है जिससे रात अत्यधिक ठंडी नहीं हो पाती|


वायु की गति- पवनें


दिन के समय हवा की दिशा समुद्र से स्थल की ओर होती है क्योंकि स्थल के ऊपर की हवा जल्दी गर्म हो जाती है और ऊपर उठने लगती है|


• रात के समय हवा की दिशा स्थल से समुद्र की ओर होती है क्योंकि रात के समय स्थल और समुद्र ठंडे होने लगते हैं| 


• एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में हवा की गति पवनों का निर्माण करती है|


वर्षा क्या है?


• दिन के समय जब जलाशयों का पानी लगातार सूर्य किरणों के द्वारा गर्म होता है और जल वाष्पित होता रहता है| वायु जलवाष्प को ऊपर ले जाती है जहाँ यह फैलती और ठंडी होती है| 


• ठंडी होकर जलवाष्प जल की बूँदों के रूप में संघनित हो जाती है| जब बूँदें आकार में बढ़ जाती है तो नीचे गिरने लगती है| इसे वर्षा कहते हैं| 


वायु प्रदूषण


• वायु में स्थित हानिकारक पदार्थों की वृद्धि, जैसे- कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर के ऑक्साइड, नाइट्रोजन, फ्लोराइड, सीसा, धूल के कण वायु प्रदूषण कहलाता है| 


• इससे मनुष्यों में श्वसन और गुर्दे की बीमारी, उच्च रक्तचाप, आँखों में जलन, कैंसर तथा पौधों में कम वृद्धि, क्लोरोफिल की गिरावट, पत्तियों पर रंग के धब्बे जैसे प्रभाव दिखाई पड़ते हैं| 


अम्लीय वर्षा


• जीवाश्मी ईंधन जब जलते हैं यह ऑक्सीकृत होकर सल्फ़र-डाइऑक्साइड (SO2) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड गैसें बनती हैं| ये गैसें वायुमंडल में मिल जाती हैं| वर्षा के समय यह गैसें पानी में घुलकर सल्फ्यूरिक अम्ल और नाइट्रिक अम्ल बनाती हैं, जो वर्षा के साथ पृथ्वी पर आता है, जिसे अम्लीय वर्षा कहते हैं| 

जल की आवश्यकता


पृथ्वी की सतह के लगभग 75% भाग पर पानी विद्यमान है| यह भूमि के अंदर भूमिगत जल के रूप में भी पाया जाता है| जल के स्रोत हैं- सागर, नदियाँ, झरने एवं झील|


• यह शरीर का ताप नियंत्रित करता है|


• जल मानव शरीर की कोशिकाओं, कोशिका-संरचनाओं तथा ऊतकों में उपस्थित जीव द्रव्य का महत्वपूर्ण संघटक है|


• यह जंतु/पौधे हेतु आवास का कार्य करता है|


• सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जल माध्यम में होती है|

जल प्रदूषण


जब पानी पीने योग्य नहीं होता तथा पानी को अन्य उपयोग में लाते हैं, उसे जल प्रदूषण कहते हैं| (जल में अवांछनीय अतिरिक्त पदार्थों का मिलना जल प्रदूषण है


कारण


• जलाशयों में उद्योगों का कचरा डालना|


• जलाशयों के नजदीक कपड़े धोना|


• जलाशयों के अवांछित पदार्थ डालना|

भूमि प्रदूषण


मृदा :- भूमि की ऊपरी सतह पौधों के लिए आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर है| इसमें कार्बनिक पदार्थ एवं वायु प्रचुर मात्रा में उपस्थित रहती है| यह सतह मृदा कहलाती है|


मिट्टी का निर्माण : निम्नलिखित कारक मृदा बनाती है


(i) सूर्य- दिन के समय सूर्य चट्टानों को गर्म करता है और वे फैलती हैं| रात को ठंडी होने से चट्टानें सिकुड़ती हैं और फैलने-सिकुड़ने से उनमें दरारें पड़ जाती हैं| इस प्रकार बड़ी-बड़ी चट्टानें छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाती हैं|


(ii) पानी- तेजी से बहता पानी भी चट्टानों को तोड़-फोड़कर टुकड़े-टुकड़े कर देता है, जो आपस में टकराकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाते हैं, जिनसे मृदा बनती है|


(iii) वायु- तेज हवाएँ भी चट्टानों को काटती हैं और मृदा बनाने के लिए रेत को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है|


(iv) जीवित जीव- लाइकेन औए मॉस चट्टानों की सतह पर उगती है और उनको कमजोर बनाकर महीन कणों में बदल देते हैं|

मृदा-अपरदन


मृदा की ऊपरी सतह वायु, जल, बर्फ एवं अन्य भौगोलिक कारकों द्वारा लगातार हटाई जाती है| भूमि की ऊपरी सतह या मृदा का हटाना, मृदा का अपरदन कहलाता है|


कारण


• भूमि को पशुओं द्वारा अधिक मात्रा में चराना|


• तेज हवाओं तथा पानी की वजह से मिट्टी की ऊपरी सतह का हटना|


• पेड़ों की कमी होने के कारण भी मिट्टी की ऊपरी परत का हटना|


जैव रासायनिक चक्रण


• जीवमंडल के जैव और अजैव घटकों में लगातार अंतःक्रिया होती रहती है|


• पौधों को C, N, O, P, S आदि तत्व और इनके खनिज की आवश्यकता होती है| ये खनिज जल, भूमि या वायु से पौधों में प्रवेश करते हैं और दूसरे स्तरों से होते हुए अपने मुख्य स्रोत में स्थानांतरित होते रहते हैं| इस प्रक्रम को जैव रासायनिक चक्र कहते हैं|


जलीय-चक्र- 

वह प्रक्रिया जिसके द्वारा जल, जलवाष्प बनता है और वर्षा के रूप में सतह पर गिरता है और फिर नदियों के द्वारा समुद्र में पहुँच जाता है, जलीय चक्र कहते हैं|


• महासगरों, समुद्रों, झीलों तथा जलाशयों का जल सूर्य की ऊष्मा के कारण वाष्पित होता रहता है| 


• पौधे मिट्टी से पानी को अवशोषित करते हैं और प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल करते हैं|


• जंतुओं में श्वसन तथा जंतुओं के शरीर द्वारा वाष्पीकरण की क्रिया से जलवाष्प वातावरण में जाती है|


• जलाशयों से होने वाले जल का वाष्पीकरण तथा संघनन हमें वर्षा प्रदान करती है| 


• जल, जो वर्षा के रूप में जमीन पर गिरता है, तुरंत ही समुद्र में नहीं बह जाता है| इसमें से कुछ जमीन के अंदर चला जाता है और भूजल का भाग बन जाता है|


• पौधे भूजल का उपयोग बार-बार करते हैं और यह प्रक्रिया चलती रहती है|



नाइट्रोजन-चक्र-

 इस प्रक्रिया में वायुमंडल की नाइट्रोजन सरल अणुओं के रूप में मृदा और पानी में आ जाती है| ये सरल अणु जटिल अणुओं में बदल जाते हैं और जीवधारियों से फिर सरल अणुओं के रूप में वायुमंडल में वापस चले जाते हैं| इस पूरी प्रक्रिया को नाइट्रोजन-चक्र कहते हैं|


वायुमंडल का 78% भाग नाइट्रोजन गैस है|


• प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल, RNA, DNA, विटामिन का आवश्यक घटक नाइट्रोजन है|


• पौधे और जंतु वायुमंडलीय नाइट्रोजन को आसानी से ग्रहण नहीं कर सकते हैं अतः इसका नाइट्रोजन के यौगिकों में बदलना आवश्यक है|


• नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करने वाले बैक्टीरिया जैसे राइजोबियम, फलीदार पौधों के जड़ों में मूल ग्रथिका नामक विशेष संरचनाओं में पाए जाते हैं|


• वायुमंडल में उपस्थित नाइट्रोजन को नाइट्रोजन यौगिकों में परिवर्तित करने का प्रक्रम नाइट्रोजन स्थिरीकरण कहलाता है|


• बिजली चमकने के समय वायु में पैदा हुआ उच्च ताप तथा दाब नाइट्रोजन को नाइट्रोजन के ऑक्साइड में बदल देता है|


• ये ऑक्साइड जल में घुलकर नाइट्रिक तथा नाइट्रस अम्ल बनाते हैं, जो वर्षा के पानी के साथ जमीन पर गिरते हैं|


• पौधे नाइट्रेटस और नाइट्राइट्स को ग्रहण करते हैं तथा उन्हें अमीनो अम्ल में बदल देते हैं| जिनका उपयोग प्रोटीन बनाने में होता है|




कार्बन-चक्र


• कार्बन-चक्र वायुमंडल में कार्बन तत्व का संतुलन बनाए रखता है|


• कार्बन पृथ्वी पर ज्यादा अवस्थाओं में पाया जाता है|


• यौगिक के रूप में यह वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में, अलग-अलग प्रकार के खनिजों में कार्बोनेट और हाइड्रोजन कार्बोनेट के रूप में पाया जाता है|


• प्रकाश संश्लेषण में पौधे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करते हैं| 


• उत्पादक स्तर (पौधों) से कार्बन उपभोक्ता स्तर (जंतुओं) तक स्थानांतरित होता है| इसका कुछ भाग श्वसन क्रिया द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के रूप में वायुमंडल में चला जाता है| 


• जीव द्रव्य के अपघटन से कार्बन वायुमंडल में पहुँचता है| 

ग्रीन हाउस प्रभाव


• वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प आदि पृथ्वी से परावर्तित होने वाले अवरक्त किरणों को अवशोषित कर लेते हैं जिससे वायुमंडल का ताप बढ़ जाता है| इसे ही ग्रीन हाउस प्रभाव कहा जाता है|


कार्बन डाइऑक्साइड का प्रतिशत बढ़ने के कारण दुष्प्रभाव:- 


ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ जाता है|


• वैश्विक ऊष्मीकरण होता है|


• पृथ्वी के औसत तापमान में वृद्धि होती है|


• चोटियों पर जमी बर्फ ग्रीन हाउस प्रभाव के कारण वर्ष भर पिघलती रहती है| 


ऑक्सीजन-चक्र


• ऑक्सीजन का मुख्य स्रोत वायुमंडल है| यह वायुमंडल में लगभग 21% उपस्थित है| यह पानी में घुले हुए रूप में जलाशयों में उपस्थित है और जलीय जीवों की जीवित रहने में सहायता करती है|


• वायुमंडल की ऑक्सीजन का उपयोग तीन प्रक्रियाओं में होता है जो श्वसन, दहन और नाइट्रोजन के ऑक्साइड का निर्माण है| 


• ऑक्सीजन सब जीवधारियों के श्वसन के लिए अनिवार्य है|


• प्रकाश संश्लेषण द्वारा ऑक्सीजन वायुमंडल में मुक्त होती है|



ओजोन परत


• ओजोन ऑक्सीजन का एक अपररूप है जिसमें ऑक्सीजन के तीन परमाणु पाए जाते हैं| यह वायुमंडल में 16 किमी. से 60 किमी. की ऊँचाई पर उपस्थित है|


• यह सूर्य से आने वाली पराबैंगनी विकिरण को अवशोषित कर लेते हैं| इस प्रकार पृथ्वी पर जीवों के लिए ओजोन परत एक सुरक्षात्मक आवरण के रूप में कार्य करती है|


• यह पराबैंगनी विकिरण से हानिकारक विकार जैसे- मोतियाबिंद, त्वचा कैंसर एवं अन्य आनुवांशिक रोगों से बचाती है|


• 1985 के आस-पास वैज्ञानिकों से अंटार्कटिक भाग के पास ओजोन छिद्र की उपस्थिति ज्ञात की|

ओजोन परत ह्रास होने के कारण


• ऐरोसॉल या क्लोरो-फ्लोरो-कार्बन (CFC) की क्रिया के कारण|


• सुपरसोनिक विमानों में ईंधन के दहन से उत्पन्न पदार्थ व नाभिकीय विस्फोट भी ओजोन परत के ह्रास होने के कारण हैं|

पृथ्वी पर संपदा


• पृथ्वी की सबसे बाहरी परत को स्थलमंडल कहते हैं, पृथ्वी की सतह से लगभग 75% भाग पर पानी है| यह भूमिगत रूप में भी पाया जाता है| 

• यह समुद्र, नदियों, झीलों, तालाबों आदि के रूप में है| इन सब को मिलाकर जलमंडल कहते हैं| वायु जो पृथ्वी पर एक कम्बल की तरह कार्य करता है, वायुमंडल कहलाता है|














Class 9 science chapter 14 question answer in hindi || 9th chapter 14 solutions in hindi

 

 


NCERT Solutions for Class 9 Science Chapter 14 Natural Resources

पाठगत प्रश्नों के उत्तर

INTEXT QUESTIONS SOLVED)

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 217)

 

 

प्र० 1. शुक्र और मंगल ग्रहों के वायुमंडल से हमारा वायुमंडल कैसे भिन्न है?
उत्तर- हमारे वायुमंडल में नाइट्रोजन कार्बन डाइऑक्साइड (0.03% से 0.07% तक), ऑक्सीजन, ऑर्गन और जलवाष्प हैं जबकि शुक्र और मंगल ग्रहों पर मुख्य घटक CO2 है जिसकी मात्रा 95-97 प्रतिशत तक है। इसलिए वहाँ कोई जीवन नहीं है परंतु पृथ्वी पर जीवन है।

 

 

 

प्र० 2. वायुमंडल कंबल की तरह कैसे कार्य करता है?
उत्तर- वायुमंडल कंबल की भाँति निम्न तरीकों से कार्य करता है।

  • वायु उष्मा का कुचालक है। वायुमंडल पृथ्वी के औसत तापमान को दिन के समय तथा पूरे वर्ष भर लगभग नियत (स्थिर) रखता है।

  • दिन के तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है तथा रात के समय ऊष्मा को बाहरी अंतरिक्ष में जाने से रोकता है।

  • वायुमंडलीय ओजोन परत सूर्य के हानिकारक विकिरण UV (Ultraviolet radiation) को स्थल पर आने से रोकता है तथा उसके हानिकारक प्रभाव से बचाता है।

प्र० 3. वायु प्रवाह (पवन) के क्या कारण हैं?
उत्तर- स्थल तथा जल के ऊपर असमान रूप में वायु के गर्म होने के कारण ही पवनें उत्पन्न होती हैं।
जलवाष्प जीवित प्राणियों के क्रियाकलापों और जल के गर्म होने के कारण बनती है।
वायुमंडल में जलवाष्प का बनना तथा वायु के गर्म होने के कारण पवन उत्पन्न होती है।
जमीन के ऊपर की हवा जल्दी गर्म होकर ऊपर उठने लगती है और समुद्र के ऊपर की हवा इस ओर आती है क्योंकि जमीन के ऊपर निम्न दाब का क्षेत्र बनता है। इसके अलावा पृथ्वी की घूर्णन गति तथा पवन के मार्ग में आने वाली पर्वत श्रृंखलाएँ भी हवा के बनने और इसकी दिशा को प्रभावित करती हैं।

 

 

 

 

प्र० 4. बादलों का निर्माण कैसे होता है?
उत्तर- दिन के समय जलीय भाग गर्म हो जाते हैं तथा बहुत अधिक मात्रा में जलवाष्प बनती है। गर्म वायु अपने साथ जलवाष्प को लेकर ऊपर की ओर जाती है यह फैलती है तथा ठंडी हो जाती है। ठंडा होने से जलवाष्प जल की छोटी-छोटी बूंदों के रूप में संघनित हो जाती है तथा बदलों को निर्माण करती है। जब ये जल की बूंदें बड़ी और भारी हो जाती हैं तो वर्षा, हिमवृष्टि ओले के रूप में नीचे गिरती है।

प्र० 5. मनुष्य के तीन क्रियाकलापों का उल्लेख करें जो वाय प्रदूषण में सहायक है।
उत्तर-

  • जीवाश्म ईंधनों जैसे कोयला और पेट्रोलियम का जलना।

  • लकड़ी, उपले (dung cakes), पत्तों आदि का पूरी तरह जलना

  • कारखानों, उद्योगों आदि से निकला विषैला धुआँ।

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 219)

प्र० 1. जीवों को जल की आवश्यकता क्यों होती है?
उत्तर- जीवों को जल की आवश्यकता निम्न क्रियाकलापों के लिए पड़ती है

  • शरीर में जीवों के सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं।

  • शरीर के एक भाग से दूसरे भाग में पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में होता है।

  • मनुष्य के शरीर का 70 % भार जल के कारण होता है।

  • जल कुछ प्राणियों का आवास भी है।

  • स्थलीय जीवों को शुद्ध जल की आवश्यकता होती है। क्योंकि खारे जल में नमक की अधिक मात्रा होने के कारण जीवों का शरीर उसे सहन नहीं कर पाता है।

  • हमारे शरीर के अंदर की कोशिकाओं में होने वाली अभिक्रियाएँ, उन पदार्थों में होती हैं जपानी में घुले होते हैं।

प्र० 2. जिस गाँव / शहर / नगर में आप रहते हैं वहाँ पर उपलब्ध शुद्ध जल का मुख्य स्रोत क्या है?
उत्तर-
स्थान जल के मुख्य स्रोत
शहर में नगरपालिका/नगर निगम जल वितरण प्रणाली
द्वारा। नगर तालाब, कुएँ नदियाँ एवं नगर वर्षा का संग्रहित जल (टैंक या डैम में), भौम जल आदि।

प्र० 3. क्या आप किसी क्रियाकलाप के बारे में जानते हैं जो इस जल के स्रोत को प्रदूषित कर रहा है।
उत्तर- हाँ, जल के स्रोत को प्रदूषित करने वाले क्रियाकलाप

  • शहर या नगर के नाले का जल और उद्योगों का कचरा नदियों तथा झीलों में प्रवाहित करना।

  • खेती में उपयोग किए गए उर्वरकों तथा पीड़कनाशियों द्वारा।

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 222)

प्र० 1. मृदा (मिट्टी) का निर्माण किस प्रकार होता है?
उत्तर- मृदा निर्माण के कारक : निम्नलिखित हैं :

(i) सूर्य दिन के समय सूर्य पत्थर को गर्म कर देता है जिससे वे प्रसारित (फैलना) हो जाते हैं। रात के समय ये पत्थर ठंडे हो जाते हैं और संकुचित हो जाते हैं। चूँकि पत्थर का प्रत्येक भाग असमान रूप से प्रसारित और संकुचित होता है। जिससे पत्थर में ऐसा बार-बार होने से दरारें पड़ जाती हैं और अंतत: छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित हो जाते हैं।

(ii) पानी पत्थरों की दरार में जल भरने तथा बाद में जम जाने पर दरारें अधिक चौड़ी हो जाती हैं। बहता जल कठोर पत्थरों को भी तोड़ देता है। तथा उन्हें अपने साथ बहा ले जाता है। ये पत्थर आपस में टकराकर छोटे-छोटे कणों में बदल जाते हैं। जल पत्थरों के इन कणों को अपने साथ ले जाता है और आगे निक्षेपित कर देता है। जिससे मृदा का निर्माण होता है।

(iii) वायु- जल की भाँति तेज हवाएँ भी पत्थरों को तोड़ देती हैं। पत्थर एक दूसरे से टकराने के कारण टूटते हैं। वायु जल की ही तरह बालु को एक स्थान से दूसरे स्थान तक उड़ा ले जाती है।

(iv) जीवित जीव लाइकेन पत्थर की तरह उगते हैं। वे एक पदार्थ छोड़ते हैं जो पत्थर की सतह को चूर्ण के समान कर देता है तथा मृदा की एक पतली परत का निर्माण करता है। इस सतह पर मॉस (moss) जैसे दूसरे छोटे पौधे उगने लगते हैं और ये पत्थर को और अधिक तोड़ देते हैं। कभी-कभी बड़े पेड़ों की मूलें दरारों में चली जाती हैं जो इसे चौड़ा कर देती हैं।

प्र० 2. मृदा-अपरदन क्या है?
उत्तर- उपरि मृदा (Top soil) का वायु, जल द्वारा स्थानांतरित होना मृदा अपरदन कहलाता है। तेज़ हवाएँएक स्थान से दूसरे स्थान तक मृदा के कण ले जाती हैं। तेज बहता हुआ जल-मिट्टी में गड्ढे बना देते हैं जिसके कारण मृदा-अपरदन होता है। जंगलों की कटाई तथा पशुचारण द्वारा भी मृदा-अपरदन होता है।

प्र० 3. अपरदन को रोकने और कम करने के कौन-कौन से तरीके हैं?
उत्तर- अपरदन को रोकने और कम करने के निम्न तरीके हैं-

  • घास एवं वनस्पति स्थल बढ़ाकर-इससे ऊपरी सतह की मिट्टी, जल या वायु द्वारा बहकर या उड़कर नहीं जा पाती है।

  • वृक्षारोपण-पौधों की जड़े मिट्टी को कसकर पकड़े रहती हैं जिससे अपरदन नहीं हो पाता है।

  • सोपानी खेती (Terrace farming)

  • पशुचारण को नियंत्रित कर (cheeking the overgrazing by animals)

  • नदियों के किनारे मजबूत बाँध बनाकर (Embankment)

  • खेतों में समुचित जल निकास व्यवस्था द्वारा (Drainage canals)

  • सघन खेती द्वारा।

NCERT पाठ्यपुस्तक (पृष्ठ संख्या 227)

प्र० 1. जल-चक्र के क्रम में पानी की कौन-कौन सी अवस्थाएँ पाई जाती हैं।
उत्तर- जल-चक्र के क्रम में पानी की निम्नलिखित अवस्थाएँ पायी जाती हैं

  • द्रवीय अवस्था (जल) – विभिन्न जल स्रोतों; जैसे-झीलों में, नदियों में, भौम जल, समुद्रों में, तालाबों में आदि।

  • गैसीय अवस्था (जलवाष्प) – जल स्रोतों से वाष्पीकरण होता है तथा पत्तियों से वाष्पोत्सर्जन।

  • बादल संघनित जलवाष्प बादलों में मौजूद होते।

  • ठोस (बर्फ) – ओले (हिमपात) बर्फबारी आदि के रूप में।

प्र० 2. जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण दो यौगिकों के नाम दीजिए जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाए जाते हैं?
उत्तर- जैविक रूप से महत्त्वपूर्ण दो यौगिक जिनमें ऑक्सीजन और नाइट्रोजन दोनों पाए जाते हैं; वे निम्न हैं :

  1. न्यूक्लिक अम्ल (DNA तथा RNA)

  2. प्रोटीन

 

 

 

प्र० 3. मनुष्य की किन्हीं तीन गतिविधियों को पहचानें जिनसे वायु में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ती है।
उत्तर- तीन क्रियाकलाप निम्नलिखित हैं

  • जंतुओं द्वारा श्वसन प्रक्रिया में CO2 गैस मुक्त होती है।

  • जीवाश्म ईंधनों; जैसे-कोयला, पेट्रोल, डीजले आदि को जलाना।

  • पेड़ काटना (deforestation)

प्र० 4. ग्रीन हाउस प्रभाव क्या है?
उत्तर- कुछ गैसै मुख्यत: CO2 और मेथेन पृथ्वी के वायुमंडल से उष्मा को बाहर जाने से रोकती हैं। वायुमंडल में इस प्रकार की गैसों में वृद्धि से संसार का तापमान बढ़ जाता है। इस प्रकार के प्रभाव को ग्रीन हाउस प्रभाव कहते हैं।

 

 

 

प्र० 5. वायुमंडल में पाए जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप कौन-कौन से हैं?
उत्तर-
(i) ऑक्सीजतन के अंणु : O2 (द्विपरमाण्विक अणु)
(ii) ओजोन : O3 (त्रिपरमाण्विक अणु)

पाठ्यपुस्तक से हल प्रश्न (NCERT TEXTBOOK QUESTIONS SOLVED)

प्र० 1. जीवन के लिए वायुमंडल क्यों आवश्यक है?
उत्तर- जीवन के लिए वायुमंडल अनेक कारणों से आवश्यक हैं, उनमें से कुछ निम्न हैं :

  • ऑक्सीजन श्वसन ज्वलन (burning) एवं दहन (combustion) के लिए जरूरी होता है।

  • प्रकाशसंश्लेषण प्रक्रिया के लिए पौधों को CO2 वायुमंडल से मिलता है।

  • ओजोन परत हानिकारक U.V. किरणों से हमारी सुरक्षा करती है। यह परत इन किरणों को अवशोषित कर लेती है और पृथ्वी की सतह तक इसे पहुँचने से रोकती है।

  • इसमें O2, CO2, N2 आदि गैसें पाई जाती हैं जो विभिन्न जैव प्रक्रियाओं के लिए अनिवार्य होता है।

  • जल में घुलनशील CO2 कार्बोनेट का निर्माण करती है जो जलीय जीवों के कवच (Shells) के निर्माण के लिए जरूरी होता है।

  • दिन के तापमान को अचानक बढ़ने से रोकता है तथा रात के समय ऊष्मा को बाहरी अंतरिक्ष में जाने से रोकता है।

 

प्र० 2. जीवन के जल क्यों अनिवार्य है?
उत्तर-

  • पानी एक अद्भुत द्रव है जिसे सार्व-विलायक कहा जाता है। यह पौधों तथा जंतुओं के शरीर में सभी चीजों को घोल लेता है।

  • जीवों के शरीर के भीतर पदार्थों का संवहन घुली हुई अवस्था में होता है।

  • लगभग सभी प्राणियों को जीवित रखने के लिए जल की आवश्यकता होती है।

  • जल कुछ जंतुओं/पौधों हेतु आवास (Habitat) का कार्य करता है।

  • हमारे शरीर के अंदर सभी कोशिकीय प्रक्रियाएँ जलीय माध्यम में होती हैं।

  • पौधों को सिंचाई के लिए पानी आवश्यक होता है। इसके कारण ही बीजों का अंकुरण संभव होता है।

  • हमारे शरीर के भार का 70% जल के कारण है।

  • पानी का उपयोग पीने, नहाने, धोने सफ़ाई करने, मछली संवर्धन, दवाई बनाने जैसे अनेक कार्यों में होता है।

  • जलीय जंतु; जैसे-मेंढक, मछली आदि जल में घुली हुई ऑक्सीजन द्वारा श्वसन क्रिया संपन्न करते हैं।

  • प्रकाशसंश्लेषण क्रिया के लिए भी जल आवश्यक होता है।

 

प्र० 3. जीवित प्राणी मृदा पर कैसे निर्भर हैं? क्या जल में रहने वाले जीव संपदा के रूप में मृदा से पूरी तरह स्वतंत्र हैं?
उत्तर- मृदा खनिजों का मिश्रण है जिसमें खनिज, ह्युमस (Humus), जल तथा वायु होते हैं। पौधे अपना खनिज पोषक तत्व जल, वायु, मिट्टी से प्राप्त कर भोजन बनाते हैं। शाकाहारी जीव पौधों पर तथा मांसाहारी जीव शाकाहारी जीवों पर निर्भर करते हैं। इसके अलावा मृदा में अनेक जीव जैसे केंचुए, चीटियाँ, दीमक, बैक्टीरिया और फंजाई आदि भी पाए जाते हैं। जलीय जीव भी मृदा से पूर्णतः स्वतंत्र नहीं हैं। वे भी मृदा पर निर्भर करते हैं। सूक्ष्मजीव (जैसे फंजाई बैक्टीरिया) जो समुद्र के निचले परत (bottom sedidonts) में पाए जाते हैं, सड़े-गले जीवों, कार्बनिक पदार्थों को विघटित कर अकार्बनिक पदार्थों [खनिज (minerals)] में बदल देते हैं। ये खनिज जल में घुलकर जलीय पौधों के लिए पोषक तत्व प्रदान करती है और अप्रत्यक्ष रूप से जंतुओं को भी। इसके अलावा पोषक तत्व मृदा से बहकर भी जल में चले जाते हैं।

 

 

 

 

प्र० 4. आपने टेलीविज़न पर और समाचारपत्र में मौसम संबंधी रिपोर्ट को देखा होगा। आप क्या सोचते हैं कि हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं?
उत्तर- हाँ, हम मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम हैं। वर्षा का पैटर्न पवनों के पैटर्न पर निर्भर करता है। इसलिए निम्न दाब तथा उच्च दाब के क्षेत्र का अध्ययन करके वर्षा का पूर्वानुमान कर सकते हैं।

अतः किसी स्थान के तापमान, आर्द्रता, वायु की गति (wind speed) तथा कंप्यूटर में संग्रहित पूर्व वर्षों के डाटा के आधार पर मौसम वैज्ञानिक (meteorologists) मौसम के पूर्वानुमान में सक्षम होते हैं। इसमें सैटेलाइट भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

 

 

 

 

 

 

प्र० 5. हम जानते हैं कि बहुत-सी मानवीय गतिविधियाँ वायु, जल एवं मृदा के प्रदूषण-स्तर को बढ़ा रहे हैं। क्या आप सोचते हैं कि इन गतिविधियों को कुछ विशेष क्षेत्रों में सीमित कर देने से प्रदूषण के स्तर को घटाने में मदद मिलेगी?
उत्तर- हाँ, प्रदूषण के स्तर को घटाने में कुछ अंश तक सहायता मिलती है। इससे मृदा प्रदूषण को तो बिलकुल कम किया जा सकता है परंतु जल और वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना कठिन होता है। जैसे वायु प्रदूषण के कारणः-

  • अम्लीय वर्षा

  • वैश्विक ऊष्मीकरण ग्रीन हाउस गैसों (CO2 मिथेन) के कारण होता है।

  • ओजोन परत में छिद्र (CFCs) के कारण।

उपर्युक्त सभी का प्रभाव पर्यावरण पर व्यापक रूप से होता है। इसी प्रकार, प्रदूषित जल नदियों, जलाशयों, समुद्रों में दूर-दूर तक बहकर चली जाती हैं भौम जल (Underground water) नालों, उद्योगों के कचरे (Industrial wastes), कृषि में प्रयुक्त कीटनाशकों, उर्वरकों द्वारा बड़े क्षेत्र को प्रभावित करती है।

 

 

प्र० 6. जंगल वायु, मृदा तथा जलीय स्रोत की गुणवत्ता को कैसे प्रभावित करते हैं?
उत्तर-

 जंगल की भूमिका वायु

  • यह प्रदूषण को अवशोषित कर वायु का शुद्धीकरण करता है।

  • CO2 और O2 का समुचित अनुपात बनाए रखने में सहायता करता है (प्रकाश संश्लेषण द्वारा)

  • यह वाष्पोत्सर्जन क्रिया द्वारा बादल निर्माण तथा आस-पास के परिवेश का तापमान कम करता है।

मिट्टी/मृदा

  • पौधों की जड़ें मिट्टी को मजबूती से जकड़े रखती है। फलतः ये मृदा अपरदन को नियंत्रित करती हैं।

  • मिट्टी की गुणवत्ता पौधों और जंतुओं के मृत अवशेषों के विघटन द्वारा ह्यूमस निर्माण से अच्छी होती है।

  • मृदा के ऊपर वनस्पति होने के कारण मिट्टी के अंदर जल रिसाव (Percolation) अच्छी तरह होता है। जिससे भौम जल के स्तर में वृद्धि होती है।

  • भूमि का खिसकना (land slides) नियंत्रित होता है।

 

 

जल

  • जंगल के कारण वर्षा अधिक होती है।

  • बाढ़ नियंत्रण में सहायता करता है।

  • भौम जल में वृद्धि करता है।

  • जल-चक्र और पृथ्वी के तापमान का नियमन करता है।